श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.16.14

नवम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

तदुपश्रुत्य दूरस्थो हा रामेत्यार्तवत्स्वनम्।

त्वरयाऽऽश्रममासाद्य ददृशे पितरं हतम्॥ १४

tadupaśrutya dūrastho hā rāmetyārtavatsvanam|

tvarayā''śramamāsādya dadṛśe pitaraṃ hatam|| 14

अर्थ

परशुरामजीने बहुत दूरसे माताका ‘हा राम!’ यह करुण-क्रन्दन सुन लिया। वे बड़ी शीघ्रतासे आश्रमपर आये और वहाँ आकर देखा कि पिताजी मार डाले गये हैं॥ १४॥✎ 1643

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1643 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: परशु-रामजीसे → परशुरामजीसे

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