श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.16.10

नवम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

एकदाऽऽश्रमतो रामे सभ्रातरि वनं गते।

वैरं सिसाधयिषवो लब्धच्छिद्रा उपागमन्॥ १०

ekadā''śramato rāme sabhrātari vanaṃ gate|

vairaṃ sisādhayiṣavo labdhacchidrā upāgaman|| 10

अर्थ

एक दिनकी बात है, परशुरामजी अपने भाइयोंके साथ आश्रमसे बाहर वनकी ओर गये हुए थे। यह अवसर पाकर वैर साधनेके लिये सहस्रबाहुके लड़के वहाँ आ पहुँचे॥ १०॥✎ 1643

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1643 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: परशु-रामजीसे → परशुरामजीसे

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