एक बार महर्षि ऋचीकसे उनकी पत्नी और सास दोनोंने ही पुत्रप्राप्तिके लिये प्रार्थना की। महर्षि ऋचीकने उनकी प्रार्थना स्वीकार करके दोनोंके लिये अलग-अलग मन्त्रोंसे चरु पकाया और स्नान करनेके लिये चले गये॥ ८॥✎ 879
स ऋषिः प्रार्थितः पत्न्या श्वश्र्वा चापत्यकाम्यया।
श्रपयित्वोभयैर्मन्त्रैश्चरुं स्नातुं गतो मुनिः॥ ८
एक बार महर्षि ऋचीकसे उनकी पत्नी और सास दोनोंने ही पुत्रप्राप्तिके लिये प्रार्थना की। महर्षि ऋचीकने उनकी प्रार्थना स्वीकार करके दोनोंके लिये अलग-अलग मन्त्रोंसे चरु पकाया और स्नान करनेके लिये चले गये॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.15.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 76) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/15/8/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#879 शब्दोंके बीचका स्थान: कियाथा—फिर → किया था—फिर