श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.15.5

नवम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

तस्य सत्यवतीं कन्यामृचीकोऽयाचत द्विजः।

वरं विसदृशं मत्वा गाधिर्भार्गवमब्रवीत्॥ ५

tasya satyavatīṃ kanyāmṛcīko'yācata dvijaḥ|

varaṃ visadṛśaṃ matvā gādhirbhārgavamabravīt|| 5

अर्थ

परीक्षित्! गाधिकी कन्याका नाम था सत्यवती। ऋचीक ऋषिने गाधिसे उनकी कन्या माँगी। गाधिने यह समझकर कि ये कन्याके योग्य वर नहीं है, ऋचीकसे कहा—॥ ५॥

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