श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.15.33

नवम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

अथार्जुनः पंचशतेषु बाहुभि-

र्धनुःषु बाणान् युगपत् स सन्दधे।

रामाय रामोऽस्त्रभृतां समग्रणी-

स्तान्येकधन्वेषुभिराच्छिनत् समम्॥ ३३

athārjunaḥ paṃcaśateṣu bāhubhi-

rdhanuḥṣu bāṇān yugapat sa sandadhe|

rāmāya rāmo'strabhṛtāṃ samagraṇī-

stānyekadhanveṣubhirācchinat samam|| 33

अर्थ

उसने एक साथ ही अपनी हजार भुजाओंसे पाँच सौ धनुषोंपर बाण चढ़ाये और परशुरामजीपर छोड़े। परन्तु परशुरामजी तो समस्त शस्त्रधारियोंके शिरोमणि ठहरे। उन्होंने अपने एक धनुषपर छोड़े हुए बाणोंसे ही एक साथ सबको काट डाला॥ ३३॥

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