श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.15.23

नवम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

स एकदा तु मृगयां विचरन् विपिने १ वने।

यदृच्छयाऽऽश्रमपदं जमद‌ग्‍नेरुपाविशत्॥ २३

sa ekadā tu mṛgayāṃ vicaran vipine vane|

yadṛcchayā''śramapadaṃ jamadagnerupāviśat|| 23

अर्थ

एक दिन सहस्रबाहु अर्जुन शिकार खेलनेके लिये बड़े घोर जंगलमें निकल गया था। दैववश वह जमदग्‍नि मुनिके आश्रमपर जा पहुँचा॥ २३॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    विजने।

    (मुद्रित पृष्ठ 78)

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