श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.14.47

नवम स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

तेनायजत यज्ञेशं१ भगवन्तमधोक्षजम्।

उर्वशीलोकमन्विच्छन् सर्वदेवमयं हरिम्॥ ४७

tenāyajata yajñeśaṃ bhagavantamadhokṣajam|

urvaśīlokamanvicchan sarvadevamayaṃ harim|| 47

अर्थ

फिर उर्वशीलोककी इच्छासे पुरूरवाने उन तीनों अग्‍नियोंद्वारा सर्वदेवस्वरूप इन्द्रियातीत यज्ञपति भगवान् श्रीहरिका यजन किया॥ ४७॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    देवेशं।

    (मुद्रित पृष्ठ 75)

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