श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.14.29

नवम स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

यद्विश्रम्भादहं नष्टा हृतापत्या च दस्युभिः।

यः शेते निशि संत्रस्तो यथा नारी दिवा पुमान्॥ २९

yadviśrambhādahaṃ naṣṭā hṛtāpatyā ca dasyubhiḥ|

yaḥ śete niśi saṃtrasto yathā nārī divā pumān|| 29

अर्थ

इसीपर विश्‍वास करनेके कारण लुटेरे मेरे बच्चोंको लूटकर लिये जा रहे हैं। मैं तो मर गयी। देखो तो सही, यह दिनमें तो मर्द बनता है और रातमें स्त्रियोंकी तरह डरकर सोया रहता है’॥ २९॥

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