श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.14.27

नवम स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

ते उपेत्य महारात्रे तमसि प्रत्युपस्थिते।

उर्वश्या उरणौ जह्रुर्न्यस्तौ राजनि जायया॥ २७

te upetya mahārātre tamasi pratyupasthite|

urvaśyā uraṇau jahrurnyastau rājani jāyayā|| 27

अर्थ

वे गन्धर्व आधी रातके समय घोर अन्धकारमें वहाँ गये और उर्वशीके दोनों भेड़ोंको, जिन्हें उसने राजाके पास धरोहर रखा था, चुराकर चलते बने॥ २७॥

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