श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.14.18

नवम स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

स तां विलोक्य नृपतिर्हर्षेणोत्फुल्ललोचनः।

उवाच श्‍लक्ष्णया वाचा देवीं हृष्टतनूरुहः॥ १८

sa tāṃ vilokya nṛpatirharṣeṇotphullalocanaḥ|

uvāca ślakṣṇayā vācā devīṃ hṛṣṭatanūruhaḥ|| 18

अर्थ

देवांगना उर्वशीको देखकर राजा पुरूरवाके नेत्र हर्षसे खिल उठे। उनके शरीरमें रोमांच हो आया। उन्होंने बड़ी मीठी वाणीसे कहा—॥ १८॥

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