श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.13.22

नवम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

शुचिस्तत्तनयस्तस्मात् सनद्वाजस्ततोऽभवत्।

ऊर्ध्वकेतुः सनद्वाजादजोऽथ पुरुजित्सुतः॥ २२

śucistattanayastasmāt sanadvājastato'bhavat|

ūrdhvaketuḥ sanadvājādajo'tha purujitsutaḥ|| 22

अर्थ

शतद्युम्‍नसे शुचि, शुचिसे सनद्वाज, सनद्वाजसे ऊर्ध्वकेतु, ऊर्ध्वकेतुसे अज, अजसे पुरुजित्, पुरुजित्से अरिष्टनेमि, अरिष्टनेमिसे श्रुतायु, श्रुतायुसे सुपार्श्‍वक, सुपार्श्‍वकसे चित्ररथ और चित्ररथसे मिथिलापति क्षेमधिका जन्म हुआ॥ २२-२३॥

यह अर्थ श्लोक 22–23 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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