॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 9.13.14
तस्मादुदावसुस्तस्य पुत्रोऽभून्नन्दिवर्धनः।
ततः सुकेतुस्तस्यापि देवरातो१ महीपते॥ १४
tasmādudāvasustasya putro'bhūnnandivardhanaḥ|
tataḥ suketustasyāpi devarāto mahīpate|| 14
अर्थ
परीक्षित्! जनकका उदावसु, उसका नन्दिवर्धन, नन्दिवर्धनका सुकेतु, उसका देवरात, देवरातका बृहद्रथ, बृहद्रथका महावीर्य, महावीर्यका सुधृति, सुधृतिका धृष्टकेतु, धृष्टकेतुका हर्यश्व और उसका मरु नामक पुत्र हुआ॥ १४-१५॥
टिप्पणियाँ
- १
रीषो।