॥ श्रीहरिः ॥
रणको भविता तस्मात् सुरथस्तनयस्ततः।
सुमित्रो नाम निष्ठान्त एते बार्हद्बलान्वयाः३॥ १५
raṇako bhavitā tasmāt surathastanayastataḥ|
sumitro nāma niṣṭhānta ete bārhadbalānvayāḥ|| 15
अर्थ
क्षुद्रकसे रणक, रणकसे सुरथ और सुरथसे इस वंशके अन्तिम राजा सुमित्रका जन्म होगा। ये सब बृहद्बलके वंशधर होंगे॥ १५॥
रणको भविता तस्मात् सुरथस्तनयस्ततः।
सुमित्रो नाम निष्ठान्त एते बार्हद्बलान्वयाः॥ १५
क्षुद्रकसे रणक, रणकसे सुरथ और सुरथसे इस वंशके अन्तिम राजा सुमित्रका जन्म होगा। ये सब बृहद्बलके वंशधर होंगे॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.12.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 66) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/12/15/टिप्पणियाँ
- ३
लाः स्मृताः।
(मुद्रित पृष्ठ 66)