परीक्षित्! एक बार अपनी प्रजाकी स्थिति जाननेके लिये भगवान् श्रीरामजी रातके समय छिपकर बिना किसीको बतलाये घूम रहे थे। उस समय उन्होंने किसीकी यह बात सुनी। वह अपनी पत्नीसे कह रहा था॥ ८॥
कदाचिल्लोकजिज्ञासुर्गूढो रात्र्यामलक्षितः।
चरन् वाचोऽशृणोद् रामो भार्यामुद्दिश्य कस्यचित्॥ ८
परीक्षित्! एक बार अपनी प्रजाकी स्थिति जाननेके लिये भगवान् श्रीरामजी रातके समय छिपकर बिना किसीको बतलाये घूम रहे थे। उस समय उन्होंने किसीकी यह बात सुनी। वह अपनी पत्नीसे कह रहा था॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.11.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 61) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/11/8/