सभी स्त्री-पुरुष जिनके चरणकमलोंका ध्यान करते रहते हैं, वे ही भगवान् श्रीराम बहुत वर्षोंतक धर्मकी मर्यादाका पालन करते हुए समयानुसार भोगोंका उपभोग करते रहे॥ ३६॥
बुभुजे च यथाकालं कामान् धर्ममपीडयन्।
वर्षपूगान् बहून् नॄणामभिध्याताङ्घ्रिपल्लवः॥ ३६
सभी स्त्री-पुरुष जिनके चरणकमलोंका ध्यान करते रहते हैं, वे ही भगवान् श्रीराम बहुत वर्षोंतक धर्मकी मर्यादाका पालन करते हुए समयानुसार भोगोंका उपभोग करते रहे॥ ३६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.11.36 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 65) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/11/36/