श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.11.31

नवम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

अथ प्रविष्टः स्वगृहं जुष्टं स्वैः पूर्वराजभिः।

अनन्ताखिलकोशाढ्यमनर्घ्योरुपरिच्छदम्॥ ३१

atha praviṣṭaḥ svagṛhaṃ juṣṭaṃ svaiḥ pūrvarājabhiḥ|

anantākhilakośāḍhyamanarghyoruparicchadam|| 31

अर्थ

इस प्रकार प्रजाका निरीक्षण करके भगवान् फिर अपने महलोंमें आ जाते । उनके वे महल पूर्ववर्ती राजाओंके द्वारा सेवित थे। उनमें इतने बड़े-बड़े सब प्रकारके खजाने थे, जो कभी समाप्त नहीं होते थे। वे बड़ी-बड़ी बहुमूल्य बहुत-सी सामग्रियोंसे सुसज्जित थे॥ ३१॥

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