श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.11.27

नवम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

प्रासादगोपुरसभाचैत्यदेवगृहादिषु ।

विन्यस्तहेमकलशैः पताकाभिश्‍च मण्डिताम्॥ २७

prāsādagopurasabhācaityadevagṛhādiṣu |

vinyastahemakalaśaiḥ patākābhiśca maṇḍitām|| 27

अर्थ

उसके महल, फाटक, सभाभवन, विहार और देवालय आदिमें सुवर्णके कलश रखे हुऐ थे और स्थान-स्थानपर पताकाएँ फहरा रही थीं॥ २७॥

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