श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.11.25

नवम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

श्रीशुक उवाच

अथादिशद् दिग्विजये भ्रातॄंस्त्रिभुवनेश्‍वरः।

आत्मानं दर्शयन् स्वानां पुरीमैक्षत सानुगः॥ २५

athādiśad digvijaye bhrātṝṃstribhuvaneśvaraḥ|

ātmānaṃ darśayan svānāṃ purīmaikṣata sānugaḥ|| 25

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—त्रिभुवनपति महाराज श्रीरामने राजसिंहासन स्वीकार करनेके बाद अपने भाइयोंको दिग्विजयकी आज्ञा दी और स्वयं अपने निजजनोंको दर्शन देते हुए अपने अनुचरोंके साथ वे पुरीकी देख-रेख करने लगे॥ २५॥

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