श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.11.19

नवम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

स्मरतां हृदि विन्यस्य विद्धं दण्डककण्टकैः।

स्वपादपल्लवं राम आत्मज्योतिरगात् ततः॥ १९

smaratāṃ hṛdi vinyasya viddhaṃ daṇḍakakaṇṭakaiḥ|

svapādapallavaṃ rāma ātmajyotiragāt tataḥ|| 19

अर्थ

तदनन्तर अपना स्मरण करनेवाले भक्तोंके हृदयमें अपने उन चरणकमलोंको स्थापित करके, जो दण्डकवनके काँटोंसे बिंध गये थे, अपने स्वयंप्रकाश परम ज्योतिर्मय धाममें चले गये॥ १९॥

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