उस समय उत्तरकोसल देशकी रहनेवाली समस्त प्रजा अपने स्वामी भगवान्को बहुत दिनोंके बाद आये देख अपने दुपट्टे हिला-हिलाकर पुष्पोंकी वर्षा करती हुई आनन्दसे नाचने लगी॥ ४२॥
धुन्वन्त उत्तरासंगान् पतिं वीक्ष्य चिरागतम्।
उत्तराः कोसला माल्यैः किरन्तो ननृतुर्मुदा॥ ४२
उस समय उत्तरकोसल देशकी रहनेवाली समस्त प्रजा अपने स्वामी भगवान्को बहुत दिनोंके बाद आये देख अपने दुपट्टे हिला-हिलाकर पुष्पोंकी वर्षा करती हुई आनन्दसे नाचने लगी॥ ४२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.10.42 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 58) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/10/42/