श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.10.26

नवम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

हा हताः स्म वयं नाथ लोकरावण रावण।

कं यायाच्छरणं लंका त्वद्विहीना परार्दिता॥ २६

hā hatāḥ sma vayaṃ nātha lokarāvaṇa rāvaṇa|

kaṃ yāyāccharaṇaṃ laṃkā tvadvihīnā parārditā|| 26

अर्थ

हाय-हाय! स्वामी! आज हम सब बेमौत मारी गयीं। एक दिन वह था, जब आपके भयसे समस्त लोकोंमें त्राहि-त्राहि मच जाती थी। आज वह दिन आ पहुँचा कि आपके न रहनेसे हमारे शत्रु लंकाकी दुर्दशा कर रहे हैं और यह प्रश्‍न उठ रहा है कि अब लंका किसके अधीन रहेगी॥ २६॥

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