श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.10.21

नवम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

रक्षःपतिः स्वबलनष्टिमवेक्ष्य रुष्ट

आरुह्य या२नकमथाभिससार रामम्।

स्वःस्यन्दने द्युमति३ मातलिनोपनीते

विभ्राजमानमहनन्‍निशितैः क्षुरप्रैः॥ २१

rakṣaḥpatiḥ svabalanaṣṭimavekṣya ruṣṭa

āruhya yānakamathābhisasāra rāmam|

svaḥsyandane dyumati mātalinopanīte

vibhrājamānamahananniśitaiḥ kṣurapraiḥ|| 21

अर्थ

जब राक्षसराज रावणने देखा कि मेरी सेनाका तो नाश हुआ जा रहा है, तब वह क्रोधमें भरकर पुष्पक विमानपर आरूढ़ हो भगवान् श्रीरामके सामने आया। उस समय इन्द्रका सारथि मातलि बड़ा ही तेजस्वी दिव्य रथ लेकर आया और उसपर भगवान् श्रीरामजी विराजमान हुए। रावण अपने तीखे बाणोंसे उनपर प्रहार करने लगा॥ २१॥

टिप्पणियाँ

  1. २

    पालक०।

    (मुद्रित पृष्ठ 55)
  2. ३

    महति।

    (मुद्रित पृष्ठ 55)

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