श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.9.6

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

सा त्वं नः स्पर्धमानानामेकवस्तुनि मानिनि।

ज्ञातीनां बद्धवैराणां शं विधत्स्व सुमध्यमे॥ ६

sā tvaṃ naḥ spardhamānānāmekavastuni mānini|

jñātīnāṃ baddhavairāṇāṃ śaṃ vidhatsva sumadhyame|| 6

अर्थ

मानिनी! वैसे हमलोग एक ही जातिके हैं। फिर भी हम सब एक ही वस्तु चाह रहे हैं, इसलिये हममें डाह और वैरकी गाँठ पड़ गयी है। सुन्दरी! तुम हमारा झगड़ा मिटा दो॥ ६॥✎ 716

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #716 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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