श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.9.20

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

कल्पयित्वा पृथक् पङ्क्तीरुभयेषां जगत्पतिः।

तांश्चोपवेशयामास स्वेषु स्वेषु च पङ्क्तिषु॥ २०

kalpayitvā pṛthak paṅktīrubhayeṣāṃ jagatpatiḥ|

tāṃścopaveśayāmāsa sveṣu sveṣu ca paṅktiṣu|| 20

अर्थ

भगवान्‌ने देवता और असुरोंकी अलग-अलग पंक्तियाँ बना दीं और फिर दोनोंको कतार बाँधकर अपने-अपने दलमें बैठा दिया॥ २०॥✎ 719 720

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #719 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #720 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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