श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.8.15

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

समुद्रः पीतकौशेयवाससी समुपाहरत्।

वरुणः स्रजं वैजयन्तीं मधुना मत्तषट्पदाम्॥ १५

samudraḥ pītakauśeyavāsasī samupāharat|

varuṇaḥ srajaṃ vaijayantīṃ madhunā mattaṣaṭpadām|| 15

अर्थ

समुद्रने पीले रेशमी वस्त्र उनको पहननेके लिये दिये। वरुणने ऐसी वैजयन्ती माला समर्पित की, जिसकी मधुमय सुगन्धसे भौंरे मतवाले हो रहे थे॥ १५॥

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