श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.7.23

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

गुणमय्या स्वशक्‍त्यास्य सर्गस्थित्यप्ययान्विभो।

धत्से यदा स्वदृग् भूमन्ब्रह्मविष्णुशिवाभिधाम्॥ २३

guṇamayyā svaśaktyāsya sargasthityapyayānvibho|

dhatse yadā svadṛg bhūmanbrahmaviṣṇuśivābhidhām|| 23

अर्थ

प्रभो! अपनी गुणमयी शक्तिसे इस जगत‍्की सृष्टि, स्थिति और प्रलय करनेके लिये आप अनन्त, एकरस होनेपर भी ब्रह्मा, विष्णु, शिव आदि नाम धारण कर लेते हैं॥ २३॥

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