श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.7.21

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

प्रजापतय ऊचुः

देवदेव महादेव भूतात्मन् भूतभावन।

त्राहि नः शरणापन्‍नांस्त्रैलोक्यदहनाद् विषात्॥ २१

devadeva mahādeva bhūtātman bhūtabhāvana|

trāhi naḥ śaraṇāpannāṃstrailokyadahanād viṣāt|| 21

अर्थ

प्रजापतियोंने भगवान् शंकरकी स्तुति की—देवताओंके आराध्यदेव महादेव! आप समस्त प्राणियोंके आत्मा और उनके जीवनदाता हैं। हमलोग आपकी शरणमें आये हैं। त्रिलोकीको भस्म करनेवाले इस उग्र विषसे आप हमारी रक्षा कीजिये॥ २१॥

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