तब देवता और असुरोंने आपसमें सन्धि समझौता करके मित्रता कर ली और परीक्षित्! वे सब मिलकर अमृत मन्थनके लिये पूर्ण उद्योग करने लगे॥ ३२॥✎ 694
ततो देवासुराः कृत्वा संविदं कृतसौहृदाः।
उद्यमं परमं चक्रुरमृतार्थे परन्तप॥ ३२
तब देवता और असुरोंने आपसमें सन्धि समझौता करके मित्रता कर ली और परीक्षित्! वे सब मिलकर अमृत मन्थनके लिये पूर्ण उद्योग करने लगे॥ ३२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.6.32 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 933) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/6/32/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)