परीक्षित्! समस्त देवताओंके तथा जगत्के एकमात्र स्वामी भगवान् अकेले ही उनका सब कार्य करनेमें समर्थ थे, फिर भी समुद्रमन्थन आदि लीलाओंके द्वारा विहार करनेकी इच्छासे वे देवताओंको सम्बोधित करके इस प्रकार कहने लगे॥ १७॥
एक एवेश्वरस्तस्मिन्सुरकार्ये सुरेश्वरः।
विहर्तुकामस्तानाह समुद्रोन्मथनादिभिः॥ १७
परीक्षित्! समस्त देवताओंके तथा जगत्के एकमात्र स्वामी भगवान् अकेले ही उनका सब कार्य करनेमें समर्थ थे, फिर भी समुद्रमन्थन आदि लीलाओंके द्वारा विहार करनेकी इच्छासे वे देवताओंको सम्बोधित करके इस प्रकार कहने लगे॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.6.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 931) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/6/17/