स विलोक्येन्द्रवाय्वादीन् निःसत्त्वान्विगतप्रभान्।
लोकानमङ्गलप्रायानसुरानयथा विभुः॥ १९
sa vilokyendravāyvādīn niḥsattvānvigataprabhān|
lokānamaṅgalaprāyānasurānayathā vibhuḥ|| 19
अर्थ
ब्रह्माजीने स्वयं देखा कि इन्द्र, वायु आदि देवता श्रीहीन एवं शक्तिहीन हो गये हैं। लोगोंकी परिस्थिति बड़ी विकट, संकटग्रस्त हो गयी है और असुर इसके विपरीत फल-फूल रहे हैं॥ १९॥
स विलोक्येन्द्रवाय्वादीन् निःसत्त्वान्विगतप्रभान्।
लोकानमङ्गलप्रायानसुरानयथा विभुः॥ १९
ब्रह्माजीने स्वयं देखा कि इन्द्र, वायु आदि देवता श्रीहीन एवं शक्तिहीन हो गये हैं। लोगोंकी परिस्थिति बड़ी विकट, संकटग्रस्त हो गयी है और असुर इसके विपरीत फल-फूल रहे हैं॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.5.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 924) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/5/19/