श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.24.60

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

अवतारो हरेर्योऽयं कीर्तयेदन्वहं नरः।

सङ्कल्पास्तस्य सिध्यन्ति स याति परमां गतिम्॥ ६०

avatāro hareryo'yaṃ kīrtayedanvahaṃ naraḥ|

saṅkalpāstasya sidhyanti sa yāti paramāṃ gatim|| 60

अर्थ

जो मनुष्य भगवान्‌के इस अवतारका प्रतिदिन कीर्तन करता है, उसके सारे संकल्प सिद्ध हो जाते हैं और उसे परमगतिकी प्राप्ति होती है॥ ६०॥✎ 846 847 848

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
  • #846 शब्दोंके बीचका स्थान: लीलामत्स्यभगवान् को → लीलामत्स्यभगवान्‌को
  • #847 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #848 शब्दोंके बीचका स्थान: थे,उनकी → थे, उनकी

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