श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.24.33

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

त्रिलोक्यां लीयमानायां संवर्ताम्भसि वै तदा।

उपस्थास्यति नौः काचिद् विशाला त्वां मयेरिता॥ ३३

trilokyāṃ līyamānāyāṃ saṃvartāmbhasi vai tadā|

upasthāsyati nauḥ kācid viśālā tvāṃ mayeritā|| 33

अर्थ

उस समय जब तीनों लोक प्रलयकालकी जलराशिमें डूबने लगेंगे, तब मेरी प्रेरणासे तुम्हारे पास एक बहुत बड़ी नौका आयेगी॥ ३३॥✎ 836

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #836 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्‌ने

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें