मत्स्यभगवान्के इस प्रकार कहनेपर वे एक-एक करके उन्हें कई अटूट जलवाले सरोवरोंमें ले गये; परन्तु जितना बड़ा सरोवर होता, उतने ही बड़े वे बन जाते। अन्तमें उन्होंने उन लीलामत्स्यको समुद्रमें छोड़ दिया॥ २३॥✎ 8332038
इत्युक्तः सोऽनयन्मत्स्यं तत्र तत्राविदासिनि।
जलाशये सम्मितं तं समुद्रे प्राक्षिपज्झषम्॥ २३
मत्स्यभगवान्के इस प्रकार कहनेपर वे एक-एक करके उन्हें कई अटूट जलवाले सरोवरोंमें ले गये; परन्तु जितना बड़ा सरोवर होता, उतने ही बड़े वे बन जाते। अन्तमें उन्होंने उन लीलामत्स्यको समुद्रमें छोड़ दिया॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.24.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 1016) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/24/23/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#833 शब्दोंके बीचका स्थान: मत्स्यभगवान् ने → मत्स्यभगवान्ने