श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.23.16

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

मन्त्रतस्तन्त्रतश्छिद्रं देशकालार्हवस्तुतः।

सर्वं करोति निश्छिद्रं नामसंकीर्तनं तव॥ १६

mantratastantrataśchidraṃ deśakālārhavastutaḥ|

sarvaṃ karoti niśchidraṃ nāmasaṃkīrtanaṃ tava|| 16

अर्थ

क्योंकि मन्त्रोंकी, अनुष्ठान-पद्धतिकी, देश, काल, पात्र और वस्तुकी सारी भूलें आपके नामसंकीर्तनमात्रसे सुधर जाती हैं; आपका नाम सारी त्रुटियोंको पूर्ण कर देता है॥ १६॥

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