॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 8.23.16
मन्त्रतस्तन्त्रतश्छिद्रं देशकालार्हवस्तुतः।
सर्वं करोति निश्छिद्रं नामसंकीर्तनं तव॥ १६
mantratastantrataśchidraṃ deśakālārhavastutaḥ|
sarvaṃ karoti niśchidraṃ nāmasaṃkīrtanaṃ tava|| 16
अर्थ
क्योंकि मन्त्रोंकी, अनुष्ठान-पद्धतिकी, देश, काल, पात्र और वस्तुकी सारी भूलें आपके नामसंकीर्तनमात्रसे सुधर जाती हैं; आपका नाम सारी त्रुटियोंको पूर्ण कर देता है॥ १६॥