त्वच्छासनातिगान् दैत्यांश्चक्रं मे सूदयिष्यति॥ ३४
na tvāmabhibhaviṣyanti lokeśāḥ kimutāpare|
tvacchāsanātigān daityāṃścakraṃ me sūdayiṣyati|| 34
अर्थ
बड़े-बड़े लोकपाल भी अब तुम्हें पराजित नहीं कर सकेंगे, दूसरोंकी तो बात ही क्या है! जो दैत्य तुम्हारी आज्ञाका उल्लंघन करेंगे, मेरा चक्र उनके टुकड़े-टुकड़े कर देगा॥ ३४॥
न त्वामभिभविष्यन्ति लोकेशाः किमुतापरे।
त्वच्छासनातिगान् दैत्यांश्चक्रं मे सूदयिष्यति॥ ३४
बड़े-बड़े लोकपाल भी अब तुम्हें पराजित नहीं कर सकेंगे, दूसरोंकी तो बात ही क्या है! जो दैत्य तुम्हारी आज्ञाका उल्लंघन करेंगे, मेरा चक्र उनके टुकड़े-टुकड़े कर देगा॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.22.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 1010) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/22/34/