कुलीनता आदि बहुत-से ऐसे कारण हैं, जो अभिमान और जडता आदि उत्पन्न करके मनुष्यको कल्याणके समस्त साधनोंसे वंचित कर देते हैं; परन्तु जो मेरे शरणागत होते हैं, वे इनसे मोहित नहीं होते॥ २७॥✎ 816
मानस्तम्भनिमित्तानां जन्मादीनां समन्ततः।
सर्वश्रेयः प्रतीपानां हन्त मुह्येन्न मत्परः॥ २७
कुलीनता आदि बहुत-से ऐसे कारण हैं, जो अभिमान और जडता आदि उत्पन्न करके मनुष्यको कल्याणके समस्त साधनोंसे वंचित कर देते हैं; परन्तु जो मेरे शरणागत होते हैं, वे इनसे मोहित नहीं होते॥ २७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.22.27 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 1009) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/22/27/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#816 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्ने