श्रीभगवान्ने कहा—ब्रह्माजी! मैं जिसपर कृपा करता हूँ, उसका धन छीन लिया करता हूँ। क्योंकि जब मनुष्य धनके मदसे मतवाला हो जाता है, तब मेरा और लोगोंका तिरस्कार करने लगता है॥ २४॥✎ 816
ब्रह्मन् यमनुगृह्णामि तद्विशो विधुनोम्यहम्।
यन्मदः पुरुषः स्तब्धो लोकं मां चावमन्यते॥ २४
श्रीभगवान्ने कहा—ब्रह्माजी! मैं जिसपर कृपा करता हूँ, उसका धन छीन लिया करता हूँ। क्योंकि जब मनुष्य धनके मदसे मतवाला हो जाता है, तब मेरा और लोगोंका तिरस्कार करने लगता है॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.22.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 1009) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/22/24/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#816 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्ने