श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! प्रह्लादजी अंजलि बाँधकर खड़े थे। उनके सामने ही भगवान् ब्रह्माजीने वामनभगवान्से कुछ कहना चाहा॥ १८॥✎ 814815
तस्यानुशृण्वतो राजन् प्रह्रादस्य कृताञ्जलेः।
हिरण्यगर्भो भगवानुवाच मधुसूदनम्॥ १८
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! प्रह्लादजी अंजलि बाँधकर खड़े थे। उनके सामने ही भगवान् ब्रह्माजीने वामनभगवान्से कुछ कहना चाहा॥ १८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.22.18 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 1008) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/22/18/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)