श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.21.25

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 21 · अथैकविंशोऽध्यायः

श्रीशुक उवाच

पत्युर्निगदितं श्रुत्वा दैत्यदानवयूथपाः।

रसां निविविशू राजन् विष्णुपार्षदताडिताः॥ २५

patyurnigaditaṃ śrutvā daityadānavayūthapāḥ|

rasāṃ niviviśū rājan viṣṇupārṣadatāḍitāḥ|| 25

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! अपने स्वामी बलिकी बात सुनकर भगवान्‌के पार्षदोंसे हारे हुए दानव और दैत्यसेनापति रसातलमें चले गये॥ २५॥

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