जब दैव तुमलोगोंके अनुकूल था, तब तुमलोगोंने भगवान्के इन पार्षदोंको कई बार जीत लिया था। पर देखो, आज वे ही युद्धमें हमपर विजय प्राप्त करके सिंहनाद कर रहे हैं॥ २३॥✎ 8091628
भवद्भिर्निर्जिता ह्येते बहुशोऽनुचरा हरेः।
दैवेनर्द्धैस्त एवाद्य युधि जित्वा नदन्ति नः॥ २३
जब दैव तुमलोगोंके अनुकूल था, तब तुमलोगोंने भगवान्के इन पार्षदोंको कई बार जीत लिया था। पर देखो, आज वे ही युद्धमें हमपर विजय प्राप्त करके सिंहनाद कर रहे हैं॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.21.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 1004) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/21/23/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#809 शब्दोंके बीचका स्थान: वामन-भगवान् को → वामन-भगवान्को