श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! भगवान्का चरणकमल सत्यलोकमें पहुँच गया। उसके नखचन्द्रकी छटासे सत्यलोककी आभा फीकी पड़ गयी। स्वयं ब्रह्मा भी उसके प्रकाशमें डूब-से गये। उन्होंने मरीचि आदि ऋषियों, सनन्दन आदि नैष्ठिक ब्रह्मचारियों एवं बड़े-बड़े योगियोंके साथ भगवान्के चरणकमलकी अगवानी की॥ १॥
सत्यं समीक्ष्याब्जभवो नखेन्दुभि-
र्हतस्वधामद्युतिरावृतोऽभ्यगात् ।
मरीचिमिश्रा ऋषयो बृहद्व्रताः
सनन्दनाद्या नरदेव योगिनः॥ १
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! भगवान्का चरणकमल सत्यलोकमें पहुँच गया। उसके नखचन्द्रकी छटासे सत्यलोककी आभा फीकी पड़ गयी। स्वयं ब्रह्मा भी उसके प्रकाशमें डूब-से गये। उन्होंने मरीचि आदि ऋषियों, सनन्दन आदि नैष्ठिक ब्रह्मचारियों एवं बड़े-बड़े योगियोंके साथ भगवान्के चरणकमलकी अगवानी की॥ १॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.21.1 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 1002) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/21/1/