श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.20.23

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

रसामचष्टाङ्‌घ्रितलेऽथ पादयो-

र्महीं महीध्रान्पुरुषस्य जङ्घयोः।

पतत्त्रिणो जानुनि विश्‍वमूर्ते-

रूर्वोर्गणं मारुतमिन्द्रसेनः॥ २३

rasāmacaṣṭāṅghritale'tha pādayo-

rmahīṃ mahīdhrānpuruṣasya jaṅghayoḥ|

patattriṇo jānuni viśvamūrte-

rūrvorgaṇaṃ mārutamindrasenaḥ|| 23

अर्थ

राजा बलिने विश्‍वरूपभगवान्‌के चरणतलमें रसातल, चरणोंमें पृथ्वी, पिंडलियोंमें पर्वत, घुटनोंमें पक्षी और जाँघोंमें मरुद्गणको देखा॥ २३॥

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