बलिने स्वयं बड़े आनन्दसे उनके सुन्दर-सुन्दर युगल चरणोंको धोया और उनके चरणोंका वह विश्वपावन जल अपने सिरपर चढ़ाया॥ १८॥
यजमानः स्वयं तस्य श्रीमत् पादयुगं मुदा।
अवनिज्यावहन्मूर्ध्नि तदपो विश्वपावनीः॥ १८
बलिने स्वयं बड़े आनन्दसे उनके सुन्दर-सुन्दर युगल चरणोंको धोया और उनके चरणोंका वह विश्वपावन जल अपने सिरपर चढ़ाया॥ १८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.20.18 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 1000) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/20/18/