श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.2.9

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

तस्य द्रोण्यां भगवतो वरुणस्य महात्मनः।

उद्यानमृतुमन्‍नाम आक्रीडं सुरयोषिताम्॥ ९

tasya droṇyāṃ bhagavato varuṇasya mahātmanaḥ|

udyānamṛtumannāma ākrīḍaṃ surayoṣitām|| 9

अर्थ

पर्वतराज त्रिकूटकी तराईमें भगवत्प्रेमी महात्मा भगवान् वरुणका एक उद्यान था। उसका नाम था ऋतुमान्। उसमें देवांगनाएँ क्रीडा करती रहती थीं॥ ९॥

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