उसकी गन्धमात्रसे सिंह, हाथी, बाघ, गैंड़े आदि हिंस्र जन्तु, नाग तथा काले-गोरे शरभ और चमरी गाय आदि डरकर भाग जाया करते थे॥ २१॥✎ 20272028
यद्गन्धमात्राद्धरयो गजेन्द्रा
व्याघ्रादयो व्यालमृगाः सखड्गाः।
महोरगाश्चापि भयाद् द्रवन्ति
सगौरकृष्णाः शरभाश्चमर्यः॥ २१
उसकी गन्धमात्रसे सिंह, हाथी, बाघ, गैंड़े आदि हिंस्र जन्तु, नाग तथा काले-गोरे शरभ और चमरी गाय आदि डरकर भाग जाया करते थे॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.2.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 911) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/2/21/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)