श्रीशुकदेवजीने कहा—परीक्षित्! क्षीरसागरमें त्रिकूट नामका एक प्रसिद्ध सुन्दर एवं श्रेष्ठ पर्वत था। वह दस हजार योजन ऊँचा था॥ १॥✎ 2026
आसीद् गिरिवरो राजंस्त्रिकूट इति विश्रुतः।
क्षीरोदेनावृतः श्रीमान्योजनायुतमुच्छ्रितः॥ १
श्रीशुकदेवजीने कहा—परीक्षित्! क्षीरसागरमें त्रिकूट नामका एक प्रसिद्ध सुन्दर एवं श्रेष्ठ पर्वत था। वह दस हजार योजन ऊँचा था॥ १॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.2.1 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 909) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/2/1/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)