श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.19.6

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

यं विनिर्जित्य कृच्छ्रेण विष्णुः क्ष्मोद्धार आगतम्।

नात्मानं जयिनं मेने तद्वीर्यं भूर्यनुस्मरन्॥ ६

yaṃ vinirjitya kṛcchreṇa viṣṇuḥ kṣmoddhāra āgatam|

nātmānaṃ jayinaṃ mene tadvīryaṃ bhūryanusmaran|| 6

अर्थ

जब विष्णुभगवान् जलमेंसे पृथ्वीका उद्धार कर रहे थे, तब वह उनके सामने आया और बड़ी कठिनाईसे उन्होंने उसपर विजय प्राप्त की। परन्तु उसके बहुत बाद भी उन्हें बार-बार हिरण्याक्षकी शक्ति और बलका स्मरण हो आया करता था और उसे जीत लेनेपर भी वे अपनेको विजयी नहीं समझते थे॥ ६॥

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