ये विश्वरूप हैं। तीन पगमें तो ये सारे लोकोंको नाप लेंगे। मूर्ख! जब तुम अपना सर्वस्व ही विष्णुको दे डालोगे, तो तुम्हारा जीवन-निर्वाह कैसे होगा॥ ३३॥
त्रिभिः क्रमैरिमाँल्लोकान्विश्वकायः क्रमिष्यति।
सर्वस्वं विष्णवे दत्त्वा मूढ वर्तिष्यसे कथम्॥ ३३
ये विश्वरूप हैं। तीन पगमें तो ये सारे लोकोंको नाप लेंगे। मूर्ख! जब तुम अपना सर्वस्व ही विष्णुको दे डालोगे, तो तुम्हारा जीवन-निर्वाह कैसे होगा॥ ३३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.19.33 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 996) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/19/33/