श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.19.33

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

त्रिभिः क्रमैरिमाँल्लोकान्विश्‍वकायः क्रमिष्यति।

सर्वस्वं विष्णवे दत्त्वा मूढ वर्तिष्यसे कथम्॥ ३३

tribhiḥ kramairimām̐llokānviśvakāyaḥ kramiṣyati|

sarvasvaṃ viṣṇave dattvā mūḍha vartiṣyase katham|| 33

अर्थ

ये विश्‍वरूप हैं। तीन पगमें तो ये सारे लोकोंको नाप लेंगे। मूर्ख! जब तुम अपना सर्वस्व ही विष्णुको दे डालोगे, तो तुम्हारा जीवन-निर्वाह कैसे होगा॥ ३३॥

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