श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.18.20

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

श्रुत्वाश्‍वमेधैर्यजमानमूर्जितं

बलिं भृगूणामुपकल्पितैस्ततः।

जगाम तत्राखिलसारसंभृतो

भारेण गां सन्‍नमयन्पदे पदे॥ २०

śrutvāśvamedhairyajamānamūrjitaṃ

baliṃ bhṛgūṇāmupakalpitaistataḥ|

jagāma tatrākhilasārasaṃbhṛto

bhāreṇa gāṃ sannamayanpade pade|| 20

अर्थ

परीक्षित्! उसी समय भगवान्‌ने सुना कि सब प्रकारकी सामग्रियोंसे सम्पन्‍न यशस्वी बलि भृगुवंशी ब्राह्मणोंके आदेशानुसार बहुत-से अश्‍वमेध यज्ञ कर रहे हैं, तब उन्होंने वहाँके लिये यात्रा की। भगवान् समस्त शक्तियोंसे युक्त हैं। उनके चलनेके समय उनके भारसे पृथ्वी पग-पगपर झुकने लगी॥ २०॥✎ 785

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #785 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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