अपने नेत्रोंके सामने भगवान्को सहसा प्रकट हुए देख अदिति सादर उठ खड़ी हुई और फिर प्रेमसे विह्वल होकर उसने पृथ्वीपर लोटकर उन्हें दण्डवत् प्रणाम किया॥ ५॥✎ 769770771772
तं नेत्रगोचरं वीक्ष्य सहसोत्थाय सादरम्।
ननाम भुवि कायेन दण्डवत् प्रीतिविह्वला॥ ५
अपने नेत्रोंके सामने भगवान्को सहसा प्रकट हुए देख अदिति सादर उठ खड़ी हुई और फिर प्रेमसे विह्वल होकर उसने पृथ्वीपर लोटकर उन्हें दण्डवत् प्रणाम किया॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.17.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 985) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/17/5/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (4)